Tuesday, November 9, 2010

Condition of Indian framer



अभी २ ही दिन हुए Delhi आये हुए. कुछ लम्हों की फुर्सत से पीपली लाइव देखि." महंगाई दायीं खाए जात है ". पीपली लाइव से पूरा देश वाकिफ हुआ. मे देरी से हुआ. कुछ हफ्तों पहेले कर्नाटक के एक तालुक मे जाने का मौका मिला. एक हफ्तों तक वहां रहा और फिर पीपली लाइव देखने का ख्याल मन मे आया.


ऐसा भी नहीं है की सरकार कुछ नहीं करती. मैंने खुद तालुक ऑफिस के कई चरकर लगा डाले तो देखा की लोवेर लेवल मे फूट फूट कर रिश्वत खोरी भरी हुई है. जिस के लिए सरकार कुछ पैसा का इंतजाम भी करती है वोह उस को मिलना तो दूर उस किसान को उस sceheme के बारे मे कुछ पता भी नहीं. मैंने तो पंचायतो को इतना बेबस कभी नहीं देखा.

INDRA आवास YOJANA मै सरकार 40000 रुपए देती है मुझसे काफी किसानो ने यह भी पूछ डाला साहब क्या आप इन 40000 मै अपना घर बना सकते हो. मैंने मना कर दिया बिलकुल नहीं. फिर एक किस्सान जबी उल्लाह खान नेई पूछा की अगर इन 40000 मै से भी आप को पुरे पैसे नहीं मिले तो आप क्या करोगे. मैंने पूछा आचा क्या आपको पुरे पैसे नहीं देती पंचायत जबी उल्लाह खान जी ने बोला अरे साहब फाइल को आगे बदने के लिए कुछ पेट्रोल तो देना ही पडता है .


क्यूँ देते हो आप कभी शिकायत नहीं की आपने अपने bill collector की अरे साहब बोहोत की है मगर सब ही मिले हुए है तो हम कहाँ जाऊ. फिर मै आगे बड़ा तो किसी ने पूछा की साहब जब आप ने अपने घर मै bathroom बनाया था तो कितने पैसे लगे थे. मैंने कहा क्यूँ पूछ रहे हो? वोह बोला चलो यह बता दो की सिटी मै कितना पैसा लगता है एक bathroom बना के लिए. मैंने कहा कम से कम 20000 तो वोह मुझ से हे सवाल पूछ डाला की साहेब फिर यह सरकार हम को BATHROOM बना के लिए 3000 क्यूँ देती है क्या बनेगा ३००० मै बताओ . मैंने यही सवाल पंचायत प्रेसिडेंट उध्पा से पूछा तो वोह बोले की हमे मालूम है मगर हम क्या करे. कितनी बार यही बात हम आगे बता देते है मगर कोई responsed तो मिले. हमको भी पता है की 3000 मै न तो toilet बन सकती है मगर क्या करे.

हर तथ्य को सरकार की ओट में देखने की जरुरत होनी नहीं चाहिये । सरकार जब दस करोड वोट से बन सकती है । और पांच करोड के लिये नीतिया बनाकर चल सकती है....तो वहां जांकने की जरुरत क्यो है । कुछ विकल्प खडे करने चाहिये तभी अंधेरा छटता लगेगा । मजा तभी है, जब हम जले और दुनिया आग पकड लें.